Vercel Employee Rescue: हवाई अड्डे पर अफरातफरी, लोग सहमे हुए, इंटरनेट ठप और गोलियों की खबरें…इसी दरमियान एक टेक कंपनी ने ऐसा कदम उठाया जिसने सबको हैरान कर दिया.
Month: February 2026
याचिका में कहा गया है कि ऐसी कई रिपोर्ट्स हैं कि यादव कम्युनिटी के लोगों ने अलग-अलग जिलों में प्रोटेस्ट किए हैं और इस बात पर गहरी चिंता जताई है कि फिल्म में इस समुदाय को ऐसे तरीके से दिखाया गया है.
श्रींगला मानते हैं कि अनिश्चितता की वजह से भारत के मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन को अमेरिका नहीं भेजने का फैसला सही था.दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए “रेसिप्रोकल टैरिफ” को रद्द करने के अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले से अंतराष्ट्रीय व्यापार में हलचल तेज़ हो गयी है.
एएसपी कटिहार अभिजीत सिंह ने बताया कि बैंक से पैसा निकालने के बाद रामदेव चौधरी जब घर की ओर जा रहे थे, तभी दो व्यक्ति आए, एक ने उनके ऊपर पान का पिक फेंक दिया. दूसरा उसे साफ करने को कहने लगा. पीक की गंदगी साफ करने के लिए जैसे ही वो झुके तभी दूसरा व्यक्ति उसके हाथ से झोला लेकर भाग गया.
रामाराजू ने आत्महत्या से पहले अपने मित्र रवि को व्हाट्सएप संदेश भेजकर इस कदम की जानकारी दी थी. सुबह करीब 8 बजे संदेश देखने के बाद रवि उनके घर पहुंचे, लेकिन तब तक तीनों की मौत हो चुकी थी.
बांग्लादेश में संविधान को ठेंगा दिखाकर चलाई यूनुस ने सरकार, सत्ता बदलते ही फूटा राष्ट्रपति का गुबार
बीएनपी सरकार बनते ही राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने पिछली अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं.
नोएडा का सूरजपुर थाना क्षेत्र उस वक्त दहल उठा, जब एक पत्नी द्वारा अपने ही सुहाग को मौत के घाट उतारने की सनसनीखेज वारदात सामने आई.
केंद्र सरकार इसे ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि एक ही राज्य के तीन अलग-अलग भाषाओं में तीन अलग-अलग नाम नहीं हो सकते. इसलिए ऐसा नाम होना चाहिए जो सभी भाषाओं में एक जैसा हो. 2011 में भी ममता बनर्जी ने पहली बार सत्ता संभालने के बाद राज्य का नाम बदलने का प्रस्ताव दिया था.
एल मेंचो भले ही मारा गया, लेकिन मेक्सिको का इतिहास गवाह है कि किसी सरगना की मौत से जंग खत्म नहीं होती बल्कि और खूनी हो जाती है. एल चापो के बाद भी ऐसा ही हुआ था.
सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि विदेश में रह रहे उनके बेटे और बेटी ने लंबे समय से उनका हाल-चाल तक नहीं लिया. इस घटना ने एक बार फिर बुजुर्गों की उपेक्षा और पारिवारिक जिम्मेदारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.