June 20, 2026

भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर जाएंगे सन्नी देओल:तनोट माता मंदिर में होगा बॉर्डर-2 मूवी का सॉन्ग लॉन्च, वरूण धवन और सोनू निगम भी रहेंगे मौजूद

बॉलीवुड अभिनेता सनी देओल अपनी पूरी टीम के साथ शुक्रवार को तनोट माता के दरबार में माथा टेकने पहुंच रहे हैं। यहां ‘बॉर्डर-2’ के पहले ऑफिशियल सॉन्ग ‘घर कब आओगे’ की लॉन्चिंग होगी। इस विशेष गीत के विमोचन के अवसर पर फिल्म की मुख्य स्टार कास्ट और क्रू मौजूद रहेगी। कार्यक्रम में अभिनेता सनी देओल, वरुण धवन और अहान शेट्टी के साथ गायक सोनू निगम, संगीतकार मिथुन और गीतकार मनोज मुंतशिर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। अक्सर देखा जाता है कि बड़े बजट की फिल्मों के लॉन्च इवेंट दुबई या मुंबई के शानदार होटलों में होते हैं। लेकिन सनी देओल ने तनोट माता मंदिर को चुनकर एक बड़ा संदेश दिया है। यह ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ का दौर है, जहाँ फिल्में अपनी जड़ों की ओर लौट रही हैं। तनोट माता का मंदिर शौर्य और शक्ति का केंद्र है, और फिल्म की शुरुआत यहीं से होना इसकी सफलता की पहली सीढ़ी मानी जा रही है। गदर-2 की महाजीत और तनोट की अटूट डोर सनी देओल का तनोट माता के प्रति यह प्रेम अचानक नहीं जागा है। इसके पीछे एक अटूट विश्वास की कहानी है। फिल्म जगत में चर्चा है कि सनी देओल जब ‘गदर-2’ की रिलीज से पहले जैसलमेर आए थे और तनोट माता की आरती में शामिल हुए थे, तो उन्होंने फिल्म की सफलता की मन्नत मांगी थी। उसके बाद जो हुआ, वह इतिहास है। फिल्म ने 500 करोड़ से अधिक की कमाई कर बॉलीवुड के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। सनी देओल मानते हैं कि तनोट माता की कृपा ने ही उनके करियर को वह दोबारा संजीवनी दी है। यही कारण है कि अब ‘बॉर्डर-2’ जैसी महत्वाकांक्षी फिल्म की शुरुआत के लिए उन्होंने किसी स्टूडियो या होटल को नहीं, बल्कि सरहद की उस पावन मिट्टी को चुना है जहाँ असली ‘बॉर्डर’ के नायक देश की रक्षा करते हैं। एम्फीथिएटर में गूंजेगी ‘मिट्टी की खुशबू’ तनोट माता मंदिर के सामने बने एम्फीथिएटर में एक अद्भुत दृश्य होगा। टी-सीरीज और जेपी फिल्म्स ने इसे एक ‘सिनेमाई इवेंट’ से ज्यादा एक ‘सैनिक सम्मान समारोह’ का रूप दिया है। क्यों खास है तनोट माता और सनी देओल का कनेक्शन? रील और रियल लाइफ हीरो का मिलन सनी देओल की तनोट यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता उनका BSF (सीमा सुरक्षा बल) के जवानों के साथ जुड़ाव है। पिछले दिनों जब वे यहाँ आए थे, तो उन्होंने जवानों के साथ ‘गदर’ के गानों पर डांस किया और उनके साथ लंगर में खाना खाया। मंदिर के पुजारियों और वहां तैनात जवानों का कहना है कि सनी देओल यहाँ एक सुपरस्टार की तरह नहीं, बल्कि एक श्रद्धावान भक्त की तरह आते हैं। वे घंटों मंदिर के संग्रहालय में बिताते हैं, जहाँ 1971 के युद्ध की निशानियां रखी हैं। इसी जुड़ाव ने उनके भीतर के ‘मेजर कुलदीप सिंह’ को आज भी जिंदा रखा है। ‘बॉर्डर-2’ से देश को क्या उम्मीदें? फिल्म समीक्षकों का मानना है कि ‘बॉर्डर-2’ केवल एक सीक्वल नहीं है, बल्कि यह सनी देओल के करियर का सबसे बड़ा दांव है। सिनेमा का बदलता रुख अक्सर देखा जाता है कि बड़े बजट की फिल्मों के लॉन्च इवेंट दुबई या मुंबई के शानदार होटलों में होते हैं। लेकिन सनी देओल ने तनोट माता मंदिर को चुनकर एक बड़ा संदेश दिया है। यह ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ का दौर है, जहाँ फिल्में अपनी जड़ों की ओर लौट रही हैं। तनोट माता का मंदिर शौर्य और शक्ति का केंद्र है, और फिल्म की शुरुआत यहीं से होना इसकी सफलता की पहली सीढ़ी मानी जा रही है। विजय का विश्वास आज जब जैसलमेर की शाम तनोट माता की आरती और ‘घर कब आओगे’ के सुरों से सजेगी, तो पूरा देश एक बार फिर देशभक्ति के ज्वर में डूबा नजर आएगा। सनी देओल की यह आस्था केवल एक निजी विश्वास नहीं, बल्कि उस भारतीय गौरव का सम्मान है जिसे उन्होंने पर्दे पर दशकों तक जिया है। “माता का आशीर्वाद और जवानों का साथ, यही है सनी देओल की बॉर्डर-2 का सबसे बड़ा हथियार।” आज के कार्यक्रम में क्या होगा खासबॉलीवुड | दैनिक भास्कर

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