Sehore Seth Jummalal Ruthia Vivek Ruthia: विवेक रूठिया के अनुसार, विरासत में मिले ऐतिहासिक दस्तावेजों और वसीयत की लिखा-पढ़ी से इस लेन-देन का खुलासा हुआ है. उनका दावा है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत एक संप्रभु देश अपने पुराने वित्तीय वादों को चुकाने के लिए बाध्य है. उनके दादा ने 1917 में जो 35 हजार रुपये उधार दिए थे अब वह करोड़ों में पहुंच गए हैं. Sehore Seth Jummalal Ruthia Vivek Ruthia: विवेक रूठिया के अनुसार, विरासत में मिले ऐतिहासिक दस्तावेजों और वसीयत की लिखा-पढ़ी से इस लेन-देन का खुलासा हुआ है. उनका दावा है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत एक संप्रभु देश अपने पुराने वित्तीय वादों को चुकाने के लिए बाध्य है. उनके दादा ने 1917 में जो 35 हजार रुपये उधार दिए थे अब वह करोड़ों में पहुंच गए हैं. NDTV India – Latest
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