बॉलीवुड एक्टर सुनील शेट्टी ने हाल ही में कहा कि किसी को जबरदस्ती भाषा बोलने के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर कोई उनसे यह कहे कि मराठी बोलना अनिवार्य है, तो वे साफ कहते हैं कि ऐसा जरूरी नहीं है। वे मराठी अपनी इच्छा से बोलेंगे, न कि किसी दबाव में। न्यूज़ एजेंसी ANI के एक इवेंट में सुनील शेट्टी ने कहा कि जब वे कम उम्र में अपने घर से बाहर निकले, तो इसका मतलब यह नहीं था कि वे अपनी पहचान छोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैं बहुत छोटी उम्र में यहां (कर्नाटक) से बाहर गया था, किसी और जैसा बनने या कोई और बनने के लिए नहीं।” उनके लिए बाहर जाना सिर्फ बेहतर मौके तलाशने का जरिया था, न कि अपनी जड़ों को मिटाना। मुंबई में करियर बनाने के बाद भी उनकी पहचान वही रही। उन्होंने कहा, “मैं जो कुछ भी करता हूं, उसमें मंगलुरु मौजूद है।” इससे उन्होंने बताया कि उनका शहर आज भी उनके काम, सोच और मूल्यों में साफ झलकता है। वहीं, मराठी भाषा को लेकर शेट्टी ने कहा कि उनसे जब पूछा जाता है कि मराठी का क्या, तो इस पर वे कहते हैं, “मराठी का क्या?” उन्होंने आगे कहा, “अगर कोई मुझसे कहे कि तुम्हें मराठी बोलनी ही पड़ेगी, तो मैं कहता हूं कि यह जरूरी नहीं है। मैं जब चाहूं, तब बोलूंगा। मुझे मजबूर मत करो।” हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि यह बात किसी का अपमान करने के लिए नहीं है। मुंबई को अपनी कर्मभूमि बताते हुए उन्होंने कहा कि मराठी सीखना उनके लिए सम्मान की बात है। “अगर यह मेरी कर्मभूमि है और मैं मराठी सीखता हूं, तो इससे बहुत से लोग खुश होंगे।” उन्होंने यह भी कहा, “मैं आज मुंबई के कई मराठी बच्चों से बेहतर मराठी बोल लेता हूं।”बॉलीवुड | दैनिक भास्कर
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