अमेरिका के अगले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार माइक वाल्ट्ज ने इस बात पर जोर दिया था कि कि अमेरिका-भारत संबंध 21वीं सदी के ‘सबसे महत्वपूर्ण’ संबंध हैं. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यह साझेदारी निर्धारित करेगी कि यह प्रकाश की सदी है या अंधकार की सदी. वाल्ट्ज ने ये टिप्पणियां सितंबर में स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में ‘यूएस इंडिया स्ट्रेटेजिक एंड पार्टनरशिप फोरम’ (यूएसआईएसपीएफ) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में की थीं.
अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ऐतिहासिक चुनावी जीत के बाद पूरे एक्शन में दिख रहे हैं. इस वक्त ट्रंप क्या कुछ कर रहे हैं, अब पूरी दुनिया की नजरें इसी पर टिकी है. दुनियाभर के नेताओं से बधाइयां मिलने के बीच ट्रंप ने अपने मंत्रियों का चुनाव भी अभी से करना शुरू कर दिया है. इसी बीच इस बात की भी चर्चा तेज हो रही है कि डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी सीनेटर मार्को रुबियो को विदेश मंत्री चुन सकते हैं. अधिकारियों ने द न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया है कि अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ट्रंप फ्लोरिडा के सीनेटर मार्को रुबियो को अमेरिकी विदेश मंत्री के रूप में नामित कर सकते हैं.
मार्को रुबियो के अमेरिकी विदेश मंत्री बनने की चर्चा होने से चीन में हड़कंप मचना तय माना जा रहा है. इसकी वजह ये है कि मार्को रुबियो चीन के खिलाफ बेहद आक्रामक रहे हैं. वहीं रुबियो को भारत का दोस्त माना जाता है, भारत के प्रति उनका रुख बहुत सकारात्मक रहा है. वहीं माइक वॉल्ट्ज को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार चुनना भारत और अमेरिका के संबंधों के लिए अच्छा साबित होगा. गौर करने वाली बात ये है कि माइक वॉल्ट्ज भी चीन को लेकर नरम नहीं है. इसके अलावा ट्रंप ने दक्षिण डकोटा की गर्वनर क्रिस्टी नोएम को नया होमलैंड सुरक्षा सचिव बनाया है. अब तक ट्रंप ने अपने कार्यकाल के लिए जिन लोगों को चुना है, उनके बारे में यहां विस्तार से जानिए.
कौन हैं मार्को रुबियो
मार्को रुबियो अमेरिका के फ्लोरिडा से ताल्लुक रखते हैं. अगर रुबियो विदेश मंत्री चुने जाते हैं तो इस पद को हासिल करने वाले देश के पहले लातीनी व्यक्तित्व होंगे. मार्को रुबियो डोनाल्ड ट्रंप के सबसे करीबियों में से एक माने जाते हैं. जब ट्रंप 20 जनवरी 2025 को राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे तो इसके बाद माना जा रहा है कि मार्को रुबियो विदेश मंत्री पद के लिए ट्रंप की पहली पसंद होंगे. उन्होंने पिछले वर्षों में अमेरिका के भू-राजनीतिक दुश्मनों (चीन, ईरान और क्यूबा) के संबंध में एक मजबूत विदेश नीति की वकालत की है. कई अमेरिकी मीडिया आउटलेट्स ने बताया है कि रुबियो विदेश मंत्री के पद के लिए ट्रंप ट्रांज़िशन टीम के साथ बातचीत कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल इसे अंतिम रूप नहीं दिया गया है.
भारत समर्थक हैं रुबियो
रुबियो को विदेश नीति का “हॉक” माना जाता है – जिसका अर्थ है कि वह ईरान के साथ-साथ चीन के प्रति भी सख्त है. यूक्रेन का समर्थन करते हुए, उन्होंने पहले कहा था कि रूस के साथ युद्ध को खत्म करने की जरूरत है. इस साल जुलाई में रुबियो ने एक विधेयक पेश किया था जिसमें कहा गया था कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के मामले में भारत के साथ जापान, इजरायल, दक्षिण कोरिया और नाटो भागीदारों जैसे सहयोगियों जैसा ही बर्ताव किया जाना चाहिए. इस विधेयक का उद्देश्य भारत को उसकी क्षेत्रीय अखंडता के लिए खतरों से निपटने में सहायता करना है और अगर पाकिस्तान भारत के खिलाफ आतंकवाद को प्रायोजित करता पाया जाता है तो उसे सुरक्षा सहायता रोकना है.
भारत-अमेरिकी की साझेदारी पर रुबियों का नजरिया
रुबियो पहले ही कह चुके हैं कि चीन इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपने क्षेत्र का आक्रामक रूप से विस्तार करना जारी रख रहा है और अमेरिका के क्षेत्रीय भागीदारों की संप्रभुता और स्वायत्तता को बाधित करना चाहता है. उनके विधेयक में कहा गया है कि कम्युनिस्ट चीन के प्रभावों का मुकाबला करने के लिए अमेरिका-भारत की साझेदारी महत्वपूर्ण है. रुबियों नई दिल्ली के साथ रणनीतिक, कूटनीतिक, आर्थिक और सैन्य संबंधों को बढ़ाने की वकालत करते रहे हैं. सितंबर 2014 में, पीएम मोदी की वाशिंगटन डीसी यात्रा के दौरान, रुबियो ने एक लेख लिखा था. उन्होंने भारत-अमेरिका संबंधों की उपेक्षा करने के लिए बराक ओबामा प्रशासन को दोषी ठहराया था.
माइक वाल्ट्ज का एनएसए चुना जाना क्यों खास
माइक वाल्ट्ज, जिन्हें अगला एनएसए चुना गया है, वो भी भारत के एक प्रमुख समर्थक हैं. उन्होंने भारत के साथ अमेरिकी रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की वकालत की है. उन्होंने चीन की व्यापार और आर्थिक नीतियों की आलोचना की है और लंबे समय से चीन के मैन्यूफैक्चरिंग पर अमेरिकी निर्भरता को कम करने और अमेरिकी टेक्नोलॉजी को मजबूत करने पर जोर दिया है. इससे पहले ट्रंप के कार्यकाल में माइक पोम्पिओ थे, जो सीआईए निदेशक थे और बाद में विदेश मंत्री बने और उनका रवैया भी चीन के प्रति सख्त ही रहा.
ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान ही भारत-अमेरिका संबंधों में मजबूती आई, जबकि इससे पहले बुश और ओबामा ने द्विपक्षीय संबंधों को नए स्तर पर पहुंचाया. ट्रंप ने चीन को रणनीतिक खतरा माना और प्रतिद्वंद्वी घोषित किया, जिससे अमेरिका-भारत संबंध और करीब आए.
अपने पहले कार्यकाल के दौरान, ट्रंप चीन को रणनीतिक खतरा माना. साथ ही ट्रंप चीन को प्रतिद्वंद्वी बताने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बने. उन्होंने 2017 में क्वाड समूह को भी पुनर्जीवित किया. इसे राष्ट्रपति जो बाइडेन ने जारी रखा और आगे बढ़ाया. अपने दूसरे कार्यकाल में, ट्रंप से चीन के प्रति यही नजरिया रखने की उम्मीद की जा रही है.
क्रिस्टी नोएम बनीं होमलैंड सुरक्षा सचिव
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने दक्षिण डकोटा की गर्वनर क्रिस्टी नोएम को नया होमलैंड सुरक्षा सचिव बनाया है. क्रिस्टी नोएम 2018 में पहली बार दक्षिण डकोटा की पहली महिला गर्वनर बनीं थीं. होमलैंड सुरक्षा विभाग में नोएम हाल ही में अमेरिका के बॉर्डर जार चुने गए टॉम होमन के साथ काम करेंगीं. नोएम ने अपने पारिवारिक खेत को चलाने के लिए 22 साल की उम्र में कॉलेज छोड़ दिया था. आपको बता दें कि 9/11 हमलों के बाद होमलैंड सिक्योरिटी विभाग बनाया गया था. जो कि अमेरिका की बड़ी सुरक्षा एजेंसी है.
इसका काम सीमा सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, आतंकी खतरों की जांच, प्राकृतिक आपदाओं पर कार्रवाई और सीमा शुल्क कानून लागू करना है. क्रिस्टी ने कहा, “मैं अमेरिका को फिर से सुरक्षित बनाने के लिए बॉर्डर जार टॉम होमन के साथ काम करने के लिए उत्सुक हूं. डोनाल्ड ट्रं के साथ, हम अपनी सीमा को सुरक्षित करेंगे, और अमेरिकी समुदायों को सुरक्षा बहाल करेंगे ताकि परिवारों को फिर से अमेरिकी सपने को पूरा करने का अवसर मिल सके.”
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