Sambhal Azam Khan Zia ur Rahman Barq And Yogi Adityanath Game Plan: जिया उर रहमान बर्क की बात आती है तो कांग्रेस और समाजवादी पार्टी उनकी बड़ी मदद कर रहे हैं. आजम खान पर चुप्पी क्यों…
Sambhal Azam Khan Zia ur Rahman Barq And Yogi Adityanath Game Plan: क्या यह महज संयोग है या फिर किसी तरीके का प्रयोग है कि संभल से पुलिस की एक टीम निकली और देर रात संभल के समाजवादी पार्टी के सांसद जिया उर रहमान बर्क के दिल्ली वाले घर पर पहुंची और उनको नोटिस थमा दिया. उनसे कहा गया है कि पुलिस आपसे पूछताछ करना चाहती है. संभल में बीते साल नवंबर के महीने में जो बवाल हुआ था, ये वही मामला है. जिया उर रहमान बर्क ने पुलिस से कहा कि अभी संसद का सत्र चल रहा है. मुझे मोहलत दीजिए. 8 अप्रैल तक का समय मांग लिया गया है. जिया उर रहमान बर्क के खिलाफ सिर्फ इसी बात का मुकदमा नहीं है, बल्कि उनके घर को लेकर आरोप यह है कि जमीन का अतिक्रमण करके और बिना नक्शा पास कराए हुए उन्होंने संभल में अपना घर बना लिया है. इस मामले में भी उनको नोटिस भेजा गया है. इसके अलावा उन पर बिजली चोरी के भी आरोप हैं और उसकी भी जांच जारी है. जिया उर रहमान बर्क समाजवादी पार्टी के पुराने नेता शफीक उर रहमान बर्क के पोते हैं. जिया उर रहमान बर्क पर कार्रवाई के बीच समाजवादी पार्टी के किंग खान आजम खान के मामले को समझ लीजिए. सबसे पहले उनके छोटे बेटे अब्दुल्ला आजम जेल से छूटे, फिर आजम खान की पत्नी तजीन फातिमा, उनकी बहन निखत और उनके बड़े बेटे अदीब आजम को रामपुर की अदालत से रेगुलर बेल मिल जाती है.
आजम खान के आरोप
क्या यह संयोग है या फिर एक तरीके का बहुत मंझा हुआ राजनीतिक प्रयोग है. फिलहाल यूपी में बीजेपी की जमीन थोड़ी ढीली हो रही है. 2014 से बीजेपी की बुलंद होती इमारत पर 2024 आते-आते सीलन आने लगी है.
बीजेपी का धीरे-धीरे ग्राफ घट रहा है और क्या इसीलिए एक नया प्लान बन रहा है. यह प्लान क्या है? पिछले साल 10 दिसंबर को रामपुर से समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष अजय सागर ने आजम खान से जेल में मुलाकात की.आजम खान लंबे अरसे से सीतापुर की जेल में हैं. उन पर एक दो नहीं 92 मुकदमे चल रहे हैं. यूपी में जब समाजवादी पार्टी की सरकार थी तो आजम खान मिनी सीएम कहलाते थे. आज उन पर बकरी चोरी से लेकर सरकारी जमीन, दलितों की जमीन कब्जा करने के एक दो नहीं कई दर्जन मुकदमे चल रहे हैं. उनकी पत्नी पर भी 30 मुकदमे हैं. आजम खान से मुलाकात के बाद समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष अजय सागर एक चिट्ठी जारी करते हैं. इस चिट्ठी का मजमून यह था कि आजम खान नाराज हैं. अखिलेश यादव से वो खफा हैं. इंडिया गठबंधन से भी वो नाराज हैं. नाराजगी का कारण बताया गया कि इंडिया गठबंधन, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने आजम और आजम के परिवार को उनके ही हाल पर छोड़ दिया है.
चिट्ठी आई और हो गई मेहरबानी
वहीं जिया उर रहमान बर्क की बात आती है तो कांग्रेस और समाजवादी पार्टी उनकी बड़ी मदद कर रहे हैं. आजम खान का आरोप है कि उनके साथ सौतेला व्यवहार हो रहा है. उनकी अनदेखी की जा रही है और इसीलिए बताया जा रहा है कि आजम खान और उनका परिवार और उनके समर्थक समाजवादी पार्टी से खफा हैं. ये बात 10 दिसंबर की है और फिर 30 दिसंबर को क्या होता है? आजम खान के खिलाफ एक मामला चल रहा होता है शत्रु संपत्ति का, उसमें उनके ओएसडी अफाक की भी जांच हो रही थी. जो जांच कर रहे थे, उस इन्वेस्टिगेटिव ऑफिसर को बदलकर दूसरे को रखा गया. उनका नाम राधाकृष्ण द्विवेदी है और उन पर यह आरोप लगाया लगा कि उन्होंने जांच में आजम और उनके करीबी लोगों को क्लीन चिट दे दी तो फिर उस इन्वेस्टिगेटिव ऑफिसर की जांच के लिए भी आईपीएस मंजिल सैनी की अगुवाई में कमेटी बन गई. मतलब यह कि जिस आदमी ने आजम खान को राहत दी है, उसकी भी जांच की जाएगी, लेकिन अचानक से 30 दिसंबर को वो जांच बंद कर दी गई. उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया. 10 दिसंबर को चिट्ठी आती है और 30 दिसंबर को आजम खान और उनके लोगों पर यह मेहरबानी हो जाती है.
ये तो पहला मामला था. आजम खान पर आरोप है कि उनका जो मौलाना अली जौहर यूनिवर्सिटी है, वो सरकारी जमीन पर कब्जा करके बनाया गया था. इसकी जो जांच चल रही थी, उस पर भी बीते कई महीनों से कोई एक्शन नहीं हुआ है. कोई पूछताछ नहीं है. एक तरीके से वो फाइल भी बंद कर दी गई है. आजम खान को छोड़कर उनके परिवार के सभी सदस्य अब जेल से बाहर हैं. आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम हरदोई जेल से निकले तो एक शब्द नहीं कहा. आजम खान की पत्नी, उनके बड़े बेटे, उनकी बहन को जब जमानत मिली, तब आजम खान के बड़े बेटे अदीब ने कहा कि अभी समय नहीं है. गाड़ी में बैठने से पहले अदीब ने बस इतना ही कहा कि जब समय आएगा तो बताएंगे कि क्या है. आखिर क्या चल रहा है? अचानक से शफीक उर रहमान बर्क के पोते जियाउर रहमान बर्क पर कार्रवाई और आजम खान से प्यार क्यों?
क्या है योगी आदित्यनाथ का प्लान
संभल को हिंदुत्व की प्रयोगशाला बनाया जा रहा है. यही कारण है कि योगी आदित्यनाथ ने वहां के सीओ अनुज चौधरी की तारीफ कर रहे हैं. वहां कुएं ढूंढे जा रहे हैं. वहां मंदिरों का जीर्णोद्धार किया जा रहा है. उन मंदिरों में जो सालों से वीरान पड़े हुए थे. खासतौर से उन इलाकों में जहां कई साल पहले हिंदू बस्तियां हुआ करती थीं और अब वहां मुस्लिम लोगों का दबदबा है. इसी कारण जिया उर रहमान बर्क पर योगी सरकार की भृकुटी तन गई है. उनके खिलाफ ताबड़तोड़ कारवाई करने की तैयारी है. अगर कोर्ट से राहत ना मिली होती तो अब तक तो वह जेल के अंदर होते. यह बात किसी से छिपी नहीं है कि आजम खान को रत्ती भर पसंद नहीं है कि उनके रहते समाजवादी पार्टी में किसी और मुस्लिम चेहरे को तरजीह दी जाए. उसको बढ़ाया जाए. जब उनसे जेल में मिलने के लिए एक नेता गए समाजवादी पार्टी के नेता गए, जो उनके बेहद करीबी माने जाते हैं तो उन्होंने इस बात पर दुख जताया कि किस तरीके से अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी दूसरे मुस्लिम चेहरों को आगे बढ़ा रही है. आजम खान की ये बात काफी हद तक सच भी है. आपने देखा होगा अखिलेश यादव जब भी संसद में होते हैं और मीडिया से बात कर रहे होते हैं तो आसपास जिया उर रहमान बर्क हमेशा नजर आते हैं. आजम खान और जिया उर रहमान बर्क के परिवारों के बीच कभी रिश्ते अच्छे नहीं रहे, क्योंकि दोनों एक ही इलाके से आते हैं. ऐसा लगता है कि योगी आदित्यनाथ एक दांव चल रहे हैं. उनके दांव में एक तरफ आजम खान का चेहरा है और दूसरी तरफ जिया उर रहमान बर्क का चेहरा है. बीच में संभल में चल रही हिंदुत्व की प्रयोगशाला है. शायद, 2027 के विधानसभा चुनाव का रास्ता यहीं से होकर गुजरेगा.
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