शशि कपूर के पास 60 के दशक के अंत तक काम या पैसा नहीं था और उन्होंने वित्तीय संकट का सामना किया. उसी बातचीत में कुणाल ने कहा था कि उनके पिता को अपनी स्पोर्ट्स कार बेचनी पड़ी थी.
बॉलीवुड के मशहूर एक्टर शशि कपूर के पास एक आकर्षक व्यक्तित्व के साथ एक प्यारी मुस्कान थी. जिसकी बदौलत वह लाखों दिलों पर राज करते थे. शशि कपूर ने 1961 में धर्मपुत्र फिल्म से बतौर अभिनेता अपने करियर की शुरुआत की थी. इसके बाद उन्होंने शर्मीली, जब जब फूल खिले, दिल ने पुकारा, हसीना मान जाएगी, कन्यादान, प्यार का मौसम और बॉम्बे टॉकी जैसी कई फिल्मों में काम किया. शशि कपूर की पर्सनल लाइफ की बात करें तो वह पृथ्वी थिएटर ग्रुप की को-मेंबर जेनिफर केंडल के प्यार में पागल थे. शशि ने केंडल से शादी की. दोनों ने साथ में अच्छा बूरा समय देखा. शादी के तुरंत बाद ही इस कपल कोगंभीर वित्तीय समस्याओं का सामना करना पड़ा क्योंकि उनके पास पैसे और काम की कमी थी. एक इंटरव्यू में शशि कपूर के बेटे कुणाल कपूर ने इस बारे में बात की थी.
2017 में Rediff.com को दिए एक इंटरव्यू में शशि कपूर के बेटे कुणाल कपूर ने खुलासा किया कि जब उनके पिता ने हिंदी फिल्मों में अपना करियर शुरू किया था, तो उन्हें अपनी फिल्म के लिए हीरोइन खोजने में समस्याओं का सामना करना पड़ा था. कुणाल ने बताया कि उनके पिता ने सिर्फ़ एक फ़िल्म निर्देशित की थी.”जब मेरे पिता को धर्मपुत्र में लीड एक्टर के रूप में लॉन्च किया गया था, तो कोई भी अभिनेत्री किसी नए अभिनेता के साथ काम नहीं करना चाहती थी. नंदा एकमात्र अभिनेत्री थीं जो उस समय स्टार होने के बावजूद उनके साथ काम करने के लिए सहमत हुईं. मेरे पिता ने सिर्फ़ एक फ़िल्म, अजूबा का निर्देशन किया था. फ़िल्म के सेट पर एक बड़ी पार्टी थी. सभी ने खूब मौज-मस्ती की.”
इंटरव्यू में आगे कुणाल ने खुलासा किया था कि उनके पिता शशि को निर्देशन में कोई दिलचस्पी नहीं थी और उन्होंने कहा कि एक अभिनेता के रूप में वे अपने काम में बहुत अच्छे थे. शशि कपूर की कुछ हिट फ़िल्में आज भी क्लासिक मानी जाती हैं. “मुझे नहीं लगता कि उन्हें निर्देशन में कोई दिलचस्पी थी. वह एक अभिनेता थे. वह फिल्म निर्माण करने वाले व्यवसायी नहीं थे. उन्होंने बेहतरीन फिल्में बनाईं क्योंकि उन्होंने अपने कलाकारों और क्रू को वह सब दिया जो वे चाहते थे. मेरे पिता क्रॉसओवर फिल्में करने वाले शुरुआती अभिनेताओं में से एक थे.
बता दें कि शशि कपूर के पास 60 के दशक के अंत तक काम या पैसा नहीं था और उन्होंने वित्तीय संकट का सामना किया. उसी बातचीत में कुणाल ने कहा था कि उनके पिता को अपनी स्पोर्ट्स कार बेचनी पड़ी थी. शशि की पत्नी और कुणाल की मां जेनिफर केंडल ने भी इसी वजह से चीजें बेचना शुरू कर दिया था. उन्होंने कहा कि 1971 की फिल्म शर्मीली के बाद उनकी स्थिति बेहतर हो गई थी. हालांकि बाद में शशि कपूर भावनात्मक और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जुझते हुए दुनिया से चले गए. 26 साल के सुखद वैवाहिक जीवन के बाद उनकी पत्नी जेनिफर केंडल का निधन हो गया.जेनिफर की मौत ने उनका दिल तोड़कर रख दिया था. शशि कपूर ने ज़्यादा शराब पीना शुरू कर दिया था और जीने की इच्छा खत्म होता गई. जहां जेनिफर की मृत्यु 7 सितंबर, 1984 को कैंसर के कारण हुई थी, वहीं भावनात्मक रूप से टूट चुके शशि ने 5 दिसंबर, 2017 को अंतिम सांस ली थी.
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