April 3, 2025
पीस प्लान के बीच पुतिन से क्यों नाराज हुए ट्रंप? ईरान पर बमबारी की धमकी का कारण भी समझें

पीस प्लान के बीच पुतिन से क्यों नाराज हुए ट्रंप? ईरान पर बमबारी की धमकी का कारण भी समझें​

दूसरी बार अमेरिकी की सत्ता संभालने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने रूस-यूक्रेन के बीच चल रही जंग को समाप्त करने की पहल की थी. लेकिन अब वह रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बहुत नाराज हैं.

दूसरी बार अमेरिकी की सत्ता संभालने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने रूस-यूक्रेन के बीच चल रही जंग को समाप्त करने की पहल की थी. लेकिन अब वह रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बहुत नाराज हैं.

Trump Angry on Putin: जब डोनाल्ड ट्रंप पहली बार अमेरिका के राष्ट्रपति बने तो उन्होंने रूस और नॉर्थ कोरिया के साथ रिश्ते सुधारने की दिशा में पहल की. जून 2019 में नॉर्थ कोरिया में कदम रखने वाले वह पहले राष्ट्रपति बने. इसे क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिहाज से ट्रंप का अहम प्रयास भी बताया गया. हालांकि दोनों देशों के संबंध में कोई खास फर्क नहीं आया. अब ट्रंप फिर से राष्ट्रपति बने तो उनका जोर रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने पर है. बाइ़डेन प्रशासन से अलग नीति अपनाते हुए उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत की पहल की.

अमेरिकी राष्ट्रपति की यह पहल यह दर्शाने के लिए काफी है कि ट्रंप ‘शांति के विचार (Peace Plan)’ पर बात करना चाहते हैं और इसके लिए वह प्रयोगधर्मी भी नजर आए. लेकिन जब उन्हें परिणाम नजर नहीं आते दिखे तो वह धमकी देने से भी बाज नहीं आते. ऐसा ही कुछ ईरान और रूस के मामले में नजर आ रहा है.

पुतिन से बहुत नाराज और गुस्से में हैं ट्रंप

अब उन्होंने साफ तौर पर कहा दिया, “वह रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से ‘बहुत नाराज’ और ‘गुस्से में’ हैं. क्योंकि पुतिन ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की की सरकार की वैधता पर सवाल उठाए हैं.” ट्रंप ने रूसी तेल पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी. दरअसल, वह पुतिन को लेकर काफी आश्वस्त नजर आ रहे थे और उन्हें उम्मीद थी कि यूक्रेन के खिलाफ रूसी हमले रोक दिए जाएंगे.

रूस के साथ सकारात्मक बातचीत को लेकर कई बार इशारा दे चुके हैं ट्रंप

जब 28 फरवरी 2025 को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की के साथ उनकी ‘विवादित बैठक’ हुई तब भी उन्होंने ऐसे ही कुछ संकेत दिए. जब रिपोर्टर ने राष्ट्रपति ट्रंप से सवाल किया, “क्या होगा अगर रूस ने युद्धविराम तोड़ दिया?” तो ट्रंप ने उल्टे जवाब दिया था कि “क्या होगा अगर आपके सिर पर बम गिरा दिया जाए?” जाहिर तौर पर ट्रंप इस बात को मानकर चल रहे थे कि उनकी पुतिन की बाचतीत सकारात्मक दिशा में जाएगी, जो अब ऐसा होता नहीं दिख रहा.

ईरान के खिलाफ भयानक बमबारी की धमकी दे रहे हैं अमेरिकी राष्ट्रपति

ऐसा ही कुछ मामला ईरान के संदर्भ में भी नजर आ रहा है. अब तक पत्र के जरिए परमाणु कार्यक्रम रोकने के लिए ईरान को मनाने की कोशिश करते दिख रहे थे. वहीं, अब बमबारी की बात भी कह रहे हैं. उन्होंने साफ तौर पर कह दिया है कि ईरान अगर नहीं कोई समझौता नहीं करता है तो हम ईरान पर बमबारी करेंगे और यह ऐसी बमबारी होगी जो उन्होंने पहले कभी नहीं देखी.

रूस ने भी दिए थे संकेत, लेकिन यहां बिगड़ा मामला!

रियाद (सऊदी अरब) में शांति वार्ता पर रूस विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने बयान दिया था, “यूरोप ने ट्रंप की Peace Plan को खारिज किया है. नेपोलियन और हिटलर ने भी रूस की हार का षड्यंत्र रचा था. Black Sea में सुरक्षित शिपिंग के लिए रूस ने अमेरिका से नई पहल में स्पष्टता की मांग की है. यूक्रेन की गारंटियां केवल अमेरिका के आदेशों पर संभव, नागरिकों पर उसके आतंकवादी हमले सिर्फ वॉशिंगटन रोक सकता है.”

साथ ही ट्रंप और पुतिन की दोस्ती के किस्से भी कई बार सामने आ चुके हैं. हाल ही में अमेरिका के विशेष राजदूत स्टीव विटकॉफ ने चुनाव अभियान के दौरान डोनाल्ड ट्रम्प को गोली लगने के बाद पुतिन की ओर से प्रार्थना किए जाने की बात भी कही थी और बताया था कि यह कहानी सुनने के बाद ट्रंप भी भावुक हो गए थे.

लेकिन जब पुतिन ने जेलेंस्की की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना शुरू कर दिया तो ट्रंप ने इस पर आपत्ति जाहिर की और टैरिफ लगाने की बात कह दी. हालांकि इस तीखी नाराज़गी जताने के बाद रूस की पहली प्रतिक्रिया आई है, जिसमें कहा गया कि वह अभी भी ‘अमेरिका के साथ काम’ कर रहा है.

इधर, ईरान भी सीधी बातचीत से कर रहा इनकार

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्किायन ने संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ सीधी बातचीत को अस्वीकार बता दिया है. डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से ईरान के सुप्रीम लीडर अली ख़ामेनेई को लिखे गए पत्र के बाद यह पहली प्रतिक्रिया है. राष्ट्र के नाम वार्षिक संबोधन के दौरान रविवार (30 मार्च) को उन्होंने साफ तौर पर कह दिया कि तेहरान केवल अमेरिका के साथ अप्रत्यथ तौर पर बातचीत के लिए तैयार है. अमेरिका के साथ सीधी बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं है.

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