अनंत सिंह, सूरजभान, सोनू-मोनू और टाल—चार नाम, चार चेहरे. लेकिन कहानी एक ही. दबदबे की, डर की और दौलत की. 30 अक्टूबर को जब दुलारचंद की हत्या की खबर आती है, तो मोकामा फिर वही सवाल पूछता है—क्या यहां कभी खून की ये दास्तान खत्म होगी? अनंत सिंह, सूरजभान, सोनू-मोनू और टाल—चार नाम, चार चेहरे. लेकिन कहानी एक ही. दबदबे की, डर की और दौलत की. 30 अक्टूबर को जब दुलारचंद की हत्या की खबर आती है, तो मोकामा फिर वही सवाल पूछता है—क्या यहां कभी खून की ये दास्तान खत्म होगी? NDTV India – Latest
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