उज्जैन, मध्यप्रदेश की कालिदास संस्कृत अकादेमी में तीन दिन तक चली इस कला प्रदर्शनी के दौरान, अनूप श्रीवास्तव की चित्रकला में एक पुकार अपने अस्तित्व में प्रकाशमान थी. एक आह्वान जो दर्शकों को भीतर तक केवल झकझोरता नहीं बल्कि एक असीम शांति, अंत का पूर्वाभास और अनंत की सौम्यता का अहसास कराता है.
चित्रकला केवल रंगों और आकृतियों का मेल नहीं होती, यह मन के गहरे भावों की एक अभिव्यक्ति और संवाद है जो चित्रकला देखने वाले को अपने अस्तित्व के नवीन आयामों से मिलवाता है. और जब यह संवाद आध्यात्म से जुड़ जाता है, तो कला का रूप और भी ऊंचाई पा लेता है. ऐसे ही एक कलाकार हैं अनूप श्रीवास्तव, जिनकी चित्रकला एक गहरे आध्यात्मिक संदेश, अनुभूति और अस्तित्व की पुकार को संप्रेषित करती है. हाल ही में उज्जैन में उनके चित्रों की प्रदर्शनी हुई, जिसका थीम था- रंग आध्यात्म.
इस प्रदर्शनी में अनूप श्रीवास्तव ने अपनी कला के माध्यम से शिव और उनके विभिन्न रूपों को उकेरा. शिव केवल एक देवता नहीं हैं, वे एक दर्शन हैं, एक अनंत ऊर्जा, जो संहार और सृजन दोनों का प्रतीक हैं. उनकी पेंटिंग्स में महाकाल का शृंगार, पुजारियों की भक्ति, अघोरियों की साधना, और महाकाल आराधना में भस्म की महत्ता को दर्शाया गया है. इन चित्रों में केवल आकृतियाँ नहीं थीं, बल्कि रंग की हर रेखा ईश्वर के प्रति नतमस्तक है और आस्था की एक गहरी कथा बुनती है.
चित्रों में आस्था की पुकार
उज्जैन, मध्यप्रदेश की कालिदास संस्कृत अकादेमी में तीन दिन तक चली इस कला प्रदर्शनी के दौरान, अनूप श्रीवास्तव की चित्रकला में एक पुकार अपने अस्तित्व में प्रकाशमान थी. एक आह्वान जो दर्शकों को भीतर तक केवल झकझोरता नहीं बल्कि एक असीम शांति, अंत का पूर्वाभास और अनंत की सौम्यता का अहसास कराता है. अनूप के ये चित्र केवल रंगों का संयोजन नहीं, बल्कि आध्यात्म की सूक्ष्मता में रंगों का ऐसा वितान हैं जिन्हें समझने के लिए प्रसंगवश आंतरिक अनुभूति को कई परतों में जोड़ना और आस्था के प्राचीन विश्वासों में मन के द्वंद्वों की आहुति देनी पड़ती है.
उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे अपने चित्रों में गहरे रंगों का उपयोग करते हैं. गहरे रंग केवल आकर्षण नहीं रचते, बल्कि वे भावनाओं की गहराई को भी प्रकट करते हैं. काले, लाल, नीले, गुलाबी, हरे और भगवा रंगों का अद्भुत संयोजन उनकी कला को एक विशिष्ट पहचान देता है. ये रंग केवल सौंदर्य की दृष्टि से नहीं चुने गए, बल्कि उनके पीछे एक गहरी आध्यात्मिक सोच है.
भस्म, अघोरी और महाकाल
अनूप एक आंतरिक अनुभूति के चित्रकार हैं. रंग आध्यात्म थीम के अंतर्गत उन्होंने अपने एक चित्र में भस्म को, जो मृत्यु और नश्वरता का प्रतीक है, शिव की उपासना में एक अनिवार्य तत्व के रूप में दर्शाया है. भस्म के बिना शिव अधूरे लगते हैं, और यही तत्व अनूप श्रीवास्तव की कला में भी परिलक्षित होता है. उसी तरह अघोरियों की साधना और उनकी रहस्यमयी दुनिया को भी उन्होंने बखूबी चित्रित किया. अघोरी साधना का मार्ग कठिन होता है, और इसे समझना भी आसान नहीं. उनके चित्रों में अघोरी सिर्फ रहस्यमयी नहीं लगते, बल्कि वे एक अलग स्तर की चेतना में दिखाई देते हैं.
रंग आध्यात्म थीम के अंतर्गत ही एक चित्र में अनूप ने महाकाल को शक्ति, ऊर्जा, आयाम और परिवर्तन का प्रतीक बनाकर न सिर्फ़ अपने चित्रों में एक पुकार को रचा है बल्कि उस पुकार को एक आनंदमयी अनुभूति भी प्रदान की है.
गहरे रंगों की रोशनी
अनूप के चित्रों में गहरे रंगों का प्रयोग महज सौंदर्य के लिए नहीं है, बल्कि उनके माध्यम से वे एक गहरी अनुभूति को प्रकट कर रहे थे. काला रंग रहस्य और निष्ठा का प्रतीक बनता है, लाल रंग ऊर्जा और भक्ति को दर्शाता है, जबकि नीला रंग अनंत आकाश और आध्यात्मिक ऊंचाइयों का प्रतीक है. भगवा रंग त्याग और सन्यास का संदेश देता है. इन रंगों का संयोजन उनकी पेंटिंग्स को एक दिव्यता प्रदान करता है.
रंग आध्यात्म थीम के अंतर्गत उनकी यह चित्रकला प्रदर्शनी उनका केवल एक कला रूप नहीं है, बल्कि एक साधना और एक खोज है, एक आध्यात्मिक यात्रा है और अनूप एक परम साधक की तरह रंगों के संसार में अपनी लय रचते नज़र आते हैं.
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