ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि अदालतों द्वारा यह तय करना कि किसी धर्म की कौन‑सी प्रथा आवश्यक है, संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत मिली धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप हो सकता है. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि अदालतों द्वारा यह तय करना कि किसी धर्म की कौन‑सी प्रथा आवश्यक है, संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत मिली धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप हो सकता है. NDTV India – Latest
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