महादेव शिव की यह अनोखी होली रंगभरी एकादशी के ठीक अगले दिन मनाने की परंपरा रही है। यह होली महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर खेली जाती है।
बाबा के गौना के लिए 151 किलो गुलाब का अबीर खासतौर से मथुरा से मंगाया गया है। इससे पहले बाबा की पालकी पर उड़ाने के लिए 51 किलो अबीर मथुरा से मंगाया जाता था।
कैबिनेट ने हाईकोर्ट के 15 मार्च के आदेश का अनुपालन करते हुए पंचायतों में आरक्षण के लिए आधार वर्ष (बेस ईयर) 1995 के बजाए 2015 को मानकर आरक्षण तय करने का निर्णय लिया था।
भगवान शिव का गंगा जल, दूध, दही, शहद, शक्कर, सफेद फूल, धतूरा, मदार, गन्ने का रस, शमी और बेलपत्र से अभिषेक करना चाहिए इससे सभी परेशानिया खत्म होती है
सरकार ने माना कि 1995 को आरक्षण रोटेशन को आधार वर्ष मानकर गलती हुई। जिसके बाद नये आरक्षण रोटेशन के लिए सरकार ने समय माँगा।
त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव के लिए सरकार ने आरक्षण नियमावली जारी करते हुए चक्रानुक्रम फार्मूले पर आरक्षित सीटें निश्चित करने का निर्णय लिया था।
भगवान शंकर की रजत मूर्ति को धारण कराया जाने वाला सेहरा सूखे मेवों से तैयार कराया गया है। माता गौरा के लिए गुजरात का गुलाबी लहंगा खासतौर से मंगाया गया है। बहुरंगी रेशमी धागों से की लहंगे पर कढ़ाई की गई है।
दोनों गाड़ियों के दुर्घटना से चीखपुकार मच गया। हादसे के बाद कंटेनर का ड्राइवर और क्लीनर फरार हो गए।
पंचायत चुनाव में खूनी खेल शुरू हो चुका है। अभी पंचायत चुनावों की तारीखों का ऐलान तो नहीं हुआ लेकिन अदावत शुरू हो चुकी है।
शिव दुल्हा के माथे पर सोहे चनरमा…’,‘अड़भंगी क चोला उतार शिव दुल्हा बना जिम्मेदार’, आदि हल्दी के पारंपरिक शिवगीतों में दुल्हे की खूबियों का बखान किया गया।