फिल्म ‘अगथिया’ 28 फरवरी को पैन इंडिया रिलीज होने वाली है। ये फिल्म तमिल के अलावा हिंदी और तेलुगु में भी रिलीज होगी। राशि खन्ना, जीवा, अर्जुन सरजा और एडवर्ड सोनेंब्लिक स्टारर इस फिल्म के डायरेक्टर पा विजय हैं। ये एक पीरियड हॉरर एक्शन कॉमेडी फिल्म है। इस फिल्म में एंजेल और डेविल के साथ आयुर्वेद सिद्धा जैसी मेडिकल पद्धति पर बात की गई है। राशि की पिछले साल रिलीज हुई फिल्म ‘द साबरमती रिपोर्ट’ काफी सुर्खियों में रही थी। वहीं, जीवा को रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण स्टारर फिल्म ‘83’ में देखा गया था। एडवर्ड अमेरिकी एक्टर हैं और उन्होंने ‘आरआरआर’ ‘केसरी‘, ‘मणिकर्णिका‘ जैसी फिल्मों में काम किया है। फिल्म की स्टारकास्ट राशि, जीवा और एडवर्ड ने दैनिक भास्कर से बातचीत की है। पढ़िए बातचीत के प्रमुख अंश… सवाल- जीवा, सबसे पहले तो आप अपने अमर चौधरी से जीवा बनने की कहानी बताइए। जवाब- मेरे पापा राजस्थान से और मेरी मम्मी मदुरई से हैं। मेरा असली नाम अमर चौधरी ही है। मैं जब इंडस्ट्री में आया, उस वक्त पर एक और एक्टर ने एंट्री ली थी। उनका नाम भी अमर था। जब उन्होंने अपना नाम अनाउंस किया, तभी मैंने अपना नाम चेंज करके जीवा रख लिया था। सवाल- राशि आप लगातार अच्छी फिल्में कर रही हैं। आपके स्क्रिप्ट का चुनाव बहुत अलग है। अभी तक जो रोल निभाया है, उसे ये किरदार कितना अलग है? जवाब- मुझे हॉरर ऐज जॉनर बहुत पसंद है। मुझे आसानी से डर नहीं लगता है। मेरे लिए हॉरर का मतलब है, जिससे मैं डर जाऊं। मैंने इस फिल्म को इसलिए साइन किया क्योंकि हॉरर फैंटेसी है और थ्रिलर भी है। मुझे नहीं लगता कि इस तरह की चीजों को हमने ज्यादा एक्सप्लोर किया है। इस फिल्म में कंप्यूटर जेनरेटेड इमेजरी (CGI) का काम एक साल तक चला है। मार्वल-डीसी के लिए जिन्होंने कंप्यूटर जेनरेटेड इमेजरी का काम किया है, उन्होंने इस फिल्म में काम किया है। वो आपको क्लाइमैक्स में दिखेगा। क्लाइमैक्स हमारी फिल्म का यूएसपी प्वाइंट है। बहुत सारे एलिमेंट है, जिसकी वजह से मैंने फिल्म साइन की है। इस फिल्म का हर कैरेक्टर इंपोर्टेंट है। फिल्म में थोड़ी बहुत कॉमेडी भी है। इमोशन और कई सारे लेयर्स भी मौजूद हैं। मैंने ऐसी फिल्म कभी नहीं की है तो मेरे लिए एक्साइटिंग फैक्टर भी था। मैंने सोचा चलो अलग-अलग जॉनर किया है, ये भी करके देखती हूं। मुझे बहुत मजा भी आया। सवाल- जीवा, आपके लिए ‘अगथिया’ क्या है? जवाब- मेरे लिए ‘अगथिया’ जरूरी फिल्म है। इस फिल्म में एक्शन, थ्रिलर, हॉरर सबकुछ है। साथ में अच्छे को-एक्टर्स भी हैं। जैसा कि आपने कहा कि फिल्म किसी भी भाषा में हो लेकिन ऑडियंस इमोशन से जुड़ जाती है। तो इस फिल्म में वो इमोशन देखने को मिलेगा। और मुझे लगता है कि पैन इंडिया ऑडियंस इस फिल्म से जुड़ पाएगी। ये एक तरह की फैमिली फिल्म है। बच्चे भी इसे देख सकते हैं। फिल्म में मार्वल के टेक्नीशियन हैं। ईरान के ग्राफिक टेक्नीशियन ने इसमें काम किया है। हमने साउथ इंडिया के ऑडियंस को दिमाग में रखकर काम किया था लेकिन फाइनल प्रोडक्ट देखने के बाद हमने इसे पैन इंडिया बनाया। सवाल- एडवर्ड आप तो पोस्टर और फिल्म हर जगह छाए हुए हो? जवाब- मुझे इस फिल्म में काम करके बहुत मजा आया। इस फिल्म में कंप्यूटर जेनरेटेड इमेजरी (CGI) का बहुत सारा काम दिखेगा। मैं खुद को इस अवतार में सोच भी नहीं सकता था, जब तक कि ये पोस्टर नहीं बना। मैंने खलनायक के रूप में बहुत काम किया है। इस फिल्म में भी मैं विलेन बना हूं। लेकिन ये वाला रोल मेरा थोड़ा अलग है क्योंकि मैं फ्रेंच विलेन बना हूं। मेरा किरदार और उसकी नीयत बहुत ज्यादा बुरी है। मैंने इसे और डरावना बनाने की कोशिश की है। सवाल- फिल्म में या सेट पर क्या चैलेंज रहा? जवाब/राशि- देखिए, मुझे तो कोई चैलेंज नहीं लगा। मैं पहले भी तमिल फिल्म कर चुकी हूं। मुझे आउटसाइडर जैसा फील नहीं होता है। मैं जब तमिल फिल्म करती हूं तो लगता है, यही की हूं। जब तेलुगु या हिंदी करती हूं तो वहां की हो जाती हूं। मेरे लिए चैलेंज डरना था। जैसा कि मैंने आपको बताया कि मुझे आसानी से नहीं डराया जा सकता है। और जब कुछ असल में नहीं हो रहा होता, ऐसे में आपको इमेजिन करना पड़ता है. तब थोड़ी मुश्किल होती है। सवाल- आजकल इंडस्ट्री में ऐतिहासिक और कल्चर से जुड़ी फिल्में ज्यादा बन रही हैं। लोगों को पसंद भी आ रही हैं। क्या कहना है आपलोगों का? जवाब/जीवा- हां, आजकल हर जगह या सोशल मीडिया पर वेस्टर्न कल्चर का इम्पैक्ट देखने मिल रहा है। लेकिन जब कहानी अपनी संस्कृति या जड़ से जुड़ी हो तो उसमें इमोशन कनेक्ट होता है। इस फिल्म की शूटिंग कोविड के बाद शुरू हुई थी। कोविड में बहुत सारे लोग आयुर्वेद, होम्योपैथी की तरफ लौटे थे। फिल्म में उसका थोड़ा इंफ्लुएंस है। इस फिल्म में हेल्थ के बारे में भी बहुत कुछ है। जवाब/राशि- मैं कहूंगी कि सिनेमा हमारे समाज और कल्चर का आईना होती है। जैसे-जैसे सोशल मीडिया आया लोग अपने कल्चर से दूर होते गए। पहले हम किताबें भी पढ़ते थे। गीत-पुराण पढ़ते थे लेकिन आजकल लोग इतना पढ़ते नहीं है। लोग विजुअल मीडिया को ज्यादा देख रहे हैं। लोग अपने कल्चर से जुड़े रहने के लिए पॉडकास्ट सुनते हैं, सिनेमा देखते हैं। ऐसे में जब ऐसी फिल्में बनती है तो लोग ज्यादा कनेक्ट कर पाते हैं। और हमें भी खुशी होती है कि हमारी फिल्म से समाज को एक मैसेज मिल रहा है। सवाल- एडवर्ड, आप भारतीय संस्कृति और आधयात्म के बारे में कितना जानते हैं? जवाब- मैं अपने परिवार के साथ हर साल एक महीने के लिए केरल आता हूं। वहां पर हम पंचकर्म केंद्र जाते हैं। मेरी पूरी फैमिली पंचकर्म ट्रीटमेंट लेती है। आयुर्वेद और सिद्धा (दक्षिण भारत की चिकित्सा पद्धति) मेरे दिल के बहुत करीब है। फिल्म में भी मेरे और अर्जुन सरजा के किरदार में सिद्धा की कहानी है। मैं तो कहूंगा कि सिद्धा इस देश और कल्चर के लिए बहुत बड़ा खजाना है। सवाल- आप तीनों ने हिंदी इंडस्ट्री में भी काम किया है और साउथ में भी। क्या अंतर महसूस होता है? जवाब/राशि- मुझे लगता है कि भाषा के अलावा ज्यादा कुछ अंतर होता नहीं है। दोनों ही इंडस्ट्री के लोग अच्छी फिल्म बनाना चाहते हैं। ऑडियंस तक अपनी रीच ज्यादा से ज्यादा बढ़ाना चाहते हैं। जवाब/एडवर्ड- मैं तो कहूंगा कि मुझे जो सबसे बड़ा अंतर दिखता है वो काम करने का तरीका है। साउथ में सेट पर काम करने का माहौल शांत रहता है। हिंदी इंडस्ट्री में सेट पर थोड़ा ज्यादा तमाशा होता है। साउथ का खाना मुझे अच्छा लगता है। जवाब/जीवा- मैंने एक फिल्म की थी ‘जिप्सी’। इस फिल्म की शूटिंग ऑल ओवर इंडिया में हुई थी। उस दौरान मुझे पूरे देश में घूमने का मौका मिला। मुझे तो लोग एक जैसे लगे। इमोशन एक जैसे हैं, फैमिली भी एक जैसी हैं। बस क्लाइमेट और फूड का अंतर है। एक अंतर ये है कि साउथ में बीच है और नॉर्थ में नदी। मैं एडवर्ड की बातों से उतना सहमत नहीं हूं। मैंने फिल्म ’83’ में काम किया है। मैं तो हिंदी इंडस्ट्री के टेक्नीशियन और मेथड को देखकर हैरान था। मुझे लगता है कि एडवर्ड ने साउथ इंडियन फिल्म में डायरेक्टर के साथ काम नहीं किया है। वहां इससे ज्यादा चिकचिक होती है। बात नॉर्थ और साउथ की नहीं है। बात किसी एक सेट की होती है। अगर प्री प्रोडक्शन का काम बेहतर ना हुआ हो तो ऐसे में प्रोड्यूसर और डायरेक्टर चिकचिक करते हैं। सवाल- आमतौर पर ऐसी धारणा है कि साउथ के लोग ज्यादा डिसिप्लिन में रहते हैं। वहां के स्टार टाइम से सेट पर आते हैं। ऐसा है क्या? जवाब/राशि- मैंने अब तक दोनों इंडस्ट्री में जिस भी फिल्म में काम किया है। वहां पर सब टाइम से ही आते हैं। मेरा कोई भी ऐसा को-स्टार नहीं रहा है, सुबह छह बजे का कॉल टाइम है तो ग्यारह बजे आ रहा हो। सब छह बजे ही आते हैं। जवाब/एडवर्ड- मैंने भी देखा है। साउथ के स्टार टाइमिंग को लेकर डिसिप्लिन हैं। जवाब/जीवा- ऐसा कुछ नहीं है। मुंबई में ट्रैफिक का भी इशू है। साउथ में भी टाइमिंग को लेकर दिक्कत होती है। अगर हिंदी इंडस्ट्री में छह बजे के कॉल टाइम में कुछ स्टार 11 बजे आते हैं तो साउथ में तो कभी-कभी दिन के 3 बजे आते हैं। ये बात स्टार और स्टारडम के ऊपर भी निर्भर करती है। इसके अलावा कई दफा सीनियर एक्टर्स होते हैं तो वो भी कहते हैं कि अगर मेरा 4 डायलॉग है तो उसके लिए पूरे दिन बैठने का कोई मतलब नहीं होता है। मैं तो कहूंगा कि हर जगह ये चीज एक जैसी है। फिल्म ’83’ के समय हमलोग लंदन में शूट कर रहे थे। वहां सुबह सात बजे का कॉल टाइम होता था। रणवीर सिंह समेत पूरी टीम सेट पर टाइम पर ही आती थी। रणवीर सिंह के अलावा और भी जो एक्टर थे, जिनका लुक चेंज किया जाता था। मैंने उन्हें सुबह ठंड में एक घंटे पहले आते हुए देखा है। वो सुबह छह बजे बैठकर अपना मेकअप करवाते थे। सवाल- हॉरर जॉनर की कौन सी फिल्म आप तीनों की फेवरेट फिल्म है? जवाब/राशि- मुझे उर्मिला मातोंडकर मैम की ‘कौन’ बहुत डरावनी लगी थी। इसके अलावा हिंदी में एक ‘नैना’ फिल्म थी, वो भी डरावनी थी। इंग्लिश फिल्म में ‘रिंग’ और रीजनल में मुझे ‘चंद्रमुखी’ से काफी डरा लगा था। जवाब/जीवा- मेरे लिए हॉलीवुड फिल्म ‘कंज्यूरिंग’ सबसे ज्यादा डरावनी फिल्म है। ये किसी भी हॉरर फिल्म पर भारी पड़ती है। मेरी फिल्म ‘सांगिली बंगिली’ भी ठीक ठाक डरावनी है। जवाब/एडवर्ड- मैं हॉरर फिल्म थोड़ा अवॉइड करता हूं। मुझे डर लगता है। मैं बहुत ज्यादा डरावनी चीजें नहीं देख सकता। मैंने बचपन में एक फिल्म देखी थी ‘एलियन’। उस मुझे पर अब तक गहरा प्रभाव है, शायद इस वजह से मैं हॉरर देखने से बचता हूं। सवाल- अगर आप तीनों को टाइम ट्रैवल करने का मौका मिले तो किस जमाने में जाना पसंद करोगे? जवाब/राशि- मैं तो 60-70 के दशक में जाने पसंद करूंगी। उस वक्त देश में नया-नया कल्चर डेवलप हो रहा था। फिल्मों में नयापन दिखने लगा था। सोसाइटी कैसी थी और सोशल मीडिया के बिना लोग कैसे रह रहे थे। तो मैं वो लाइफ देखना चाहूंगी। जवाब/जीवा- मैं भी सोशल मीडिया से पहले वाला दौर देखना चाहूंगा। अभी तो कुछ सीक्रेट नहीं रह गया है। अभी एक्टर की लाइफ की पल-पल जानकारी और पैपराजी कल्चर एक्टर्स को थोड़ा असहज करता है। इसके अलावा मैं टाइम ट्रैवल करके अपनी फ्लॉप फिल्मों को बदलना चाहूंगा। सवाल- अगर आप सबके पास गायब होने का पावर आ जाए या भूत बनने का मौका मिले तो किसे डराना चाहेंगे? जवाब/राशि- इनविजिबल पावर मिलने पर मैं तो गायब ही रहना पसंद करूंगी। भूत बनी तो मैं अपने भाई और अपनी दोस्त तमन्ना भाटिया को डराना पसंद करुंगी। तमन्ना को बहुत डर लगता है। जवाब/जीवा- राशि कहती रहती हैं कि इन्हें डर नहीं लगता तो मैं इन्हें ही डराऊंगा। और इनविजिबल होकर हॉलीवुड स्टूडियो में चिल करूंगा। वहां से काफी कुछ सीखूंगा और इंडिया में अप्लाई करूंगा। जवाब/एडवर्ड- अगर सुपर पावर मिले तो मुझे उड़ने का सुपर पावर चाहिए। मैं किसी को डराना नहीं चाहता हूं। किसी पर स्पाई नहीं करना चाहता हूं।बॉलीवुड | दैनिक भास्कर