गुजरे जमाने की अभिनेत्रियों खूबसूरत होने के साथ-साथ बेहतरीन अभिनय के लिए भी मशहूर थीं. हिंदी सिनेमा के गोल्डन एरा की इन तीन टाइमलेस ब्यूटीज को लोग आज भी याद करते हैं.
हिंदी सिनेमा में कई दिग्गज अभिनेत्रियां रही हैं, जो अपनी खूबसूरती के लिए खूब चर्चित हुई हैं. गुजरे जमाने की अभिनेत्रियों खूबसूरत होने के साथ-साथ बेहतरीन अभिनय के लिए भी मशहूर थीं. हिंदी सिनेमा के गोल्डन एरा की इन तीन टाइमलेस ब्यूटी की इस रेयर तस्वीर पर नजर डालिए. इसमें नरगिस दत्त, वैजयंती माला और एक्ट्रेस व सिंगर सुरैया मॉडर्न लुक में नजर आ रही हैं. इन तीनों हसीनाओं के टैलेंट, ग्रेस और इनकी खूबसूरती के जादुई करिश्मे ने हिंदी सिनेमा को नई पहचान दी थी. हिंदी सिनेमा में इन तीनों लीजेंड्री अभिनेत्रियों का शानदार योगदान रहा है. आज भी लोग इनकी फिल्में देखना पसंद करते हैं.
हिंदी सिनेमा की टाइमलेस ब्यूटी
नरगिस बॉलीवुड की शानदार और दमदार एक्ट्रेस रह चुकी हैं. हिंदी सिनेमा की ‘मदर इंडिया’ एक्ट्रेस नरगिस अपने समय की पावर-परफॉर्मेंस एक्ट्रेस रह चुकी हैं. नरगिस ने साल 1935 में फिल्म तलाशे हक में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट काम किया था. बरसात, श्री 420, मदर इंडिया और आवारा इनकी बिग हिट फिल्में हैं. सुनील दत्त की पत्नी और संजय दत्त की मां नरगिस का निधन 51 साल की उम्र में हो गया था. नरगिस के दौर में ही वैजयंती माला का अपना अलग नाम था. साउथ सिनेमा से हिंदी सिनेमा में आईं वैजयंतीमाला आज 91 साल की हैं और आज भी एक्टिव रहती हैं.
हिंदी सिनेमा की ‘चंद्रमुखी’
वैजयंती माला ने हिंदी सिनेमा में साल 1951 में आई फिल्म बहार से डेब्यू किया था. इसके बाद वैजयंती माला ने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. ‘मैं क्या करू राम मुझे बुड्ढा मिल’ गया सॉन्ग वैजयंती माला पर ही फिल्माया गया है. दिलीप कुमार की देवदास (1955) में वैजयंती माला ने चंद्रमुखी का रोल प्ले किया था. वैजयंती माला को आखिरी बार फिल्म गंवार (1970) में देखा गया था.
पार्श्व गायिका और एक्ट्रेस सुरैया
हिंदी सिनेमा के सदाबहार सुपरस्टार देव आनंद ने जिनको दिल दिया वह सुरैया हैं, जिनका हिंदी सिनेमा में योगदान भुलाया नहीं जा सकता . बता दें, सुरैया आजाद भारत की पहली एक्टर-सिंगर हैं. देव आनंद ने फिल्म अफसर के सेट पर सुरैया को प्रपोज किया था और उन्हें हीरे की रिंग सगाई में पहनाई थी. हालांकि कुछ कारणों से दोनों की शादी नहीं हुई. बता दें, पत्नी सुरैया के अंतिम संस्कार में देव आनंद इसलिए नहीं गए थे, क्योंकि वह उनकी यादों से बाहर नहीं आ पा रहे थे. वहीं, भारत सरकार ने सिनेमा के 100 साल होने के मौके पर साल 2013 में सुरैया की तस्वीरों वाले डाक स्टाम्प भी जारी किये थे.
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