April 6, 2025
भस्म आरती, इत्र दृव्य, भांग से श्रृंगार... महाशिवरात्रि पर कैसे होती है उज्जैन में बाबा महाकाल की खास पूजा?

भस्म आरती, इत्र-दृव्य, भांग से श्रृंगार… महाशिवरात्रि पर कैसे होती है उज्जैन में बाबा महाकाल की खास पूजा?​

Ujjian Mahakaleshwar: महाशिवरात्रि के मौके पर उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर का नजारा बहुत ही अद्भुत है. श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार महाकाल के दर पर पहुंच रही है. मंदिर में 9 दिन तक चलने वाली खास पूजा का भी आज समापन होने को है.

Ujjian Mahakaleshwar: महाशिवरात्रि के मौके पर उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर का नजारा बहुत ही अद्भुत है. श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार महाकाल के दर पर पहुंच रही है. मंदिर में 9 दिन तक चलने वाली खास पूजा का भी आज समापन होने को है.

देशभर में आज महाशिवरात्रि (Mahasgivratri) की धूम है. हर तरफ बम-बम भोले की गूंज सुनाई दे रही है. इस बीच उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग (Ujjain Mahakaleshwar Temple) का नजारा बहुत ही दिव्य और भव्य है. मंदिर पूरी तरह से रोशनी में सराबोर है. बाबा की एक झलक पाने को भक्त बेताब हैं. भक्तों का सैलाब सुबह से ही उमड़ रहा है. सुबह ढाई बजे ही मंदिर के द्वार खोल दिए गए थे. परंपरा के मुताबिक बाबा का पूजन किया गया. बाबा महाकाल की पूजा के बारे में डिटेल में जानिए.

#WATCH मध्य प्रदेश: महाशिवरात्रि के अवसर पर उज्जैन के श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में आरती की जा रही है। pic.twitter.com/AFFhegOHXK

— ANI_HindiNews (@AHindinews) February 25, 2025

कैसे हुई बाबा महाकाल की पूजा?

महकालेश्वर मंदिर के पुजारी के मुताबिक, सबसे पहले बाबा महाकाल की भस्मारती हुई. कई तरह के सुगंधित इत्र, दृव्य पंचामृत आदि से बाबा को स्नान कराया गया. फिर भांग से दिव्य श्रृंगार किया गया. इस दौरान उन पर कई तरह के रत्न लगाए गए. फिर मुकुट और वस्त्रादि उनको अर्पण किए गए. इसके बाद भक्तों ने राजाधिराज के दर्शन किए. उन्होंने बताया कि रात्रि 12 बजे तक बाबा पर जलधारा चलती रहेगी.

#WATCH उज्जैन (मध्य प्रदेश): महाशिवरात्रि के अवसर पर श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में विशेष भस्म आरती की जा रही है। pic.twitter.com/GkB2CAVUOj

— ANI_HindiNews (@AHindinews) February 25, 2025

उन्होंने बताया कि महाशिवरात्रि के मौके पर मंदिर में 9 दिन तक नवरात्रि मनाई जाती है. पिछले 8 दिनों से खास पूजा आयोजित की जा रही थी. आज पूजा का 9वां दिन है. इस दौरान हर दिन भगवान का अलौकिक श्रृंगार किया जाता है.

बाबा महाकाल की आरती का समय जानिए

भस्म आरती-सुबह 4 बजेदत्योदक आरती-सुबह 7 बजेभोग आरती- सुबह 10 बजेपूजन आरती-शाम 5 बजेसंध्या आरती-शाम 7 बजेशयन आरती-रात 10.30 बजे

कैसे हुई बाबा महाकाल की भस्म आरती?

बाबा महाकालेश्वर को सबसे पहले भस्म से स्नान कराया गया. सुबह 4 बजे ताजा भस्म से स्नान कराकर बाबा की भस्म आरती की गई. ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच मंदिर के पुजारियों ने बाबा को भस्म अर्पण की. इस दौरान वहां मौजूद सभी पुजारी मंत्रोच्चारण करते रहे. महाकालेश्वर मंदिर का ये नजारा बहुत ही अलौकिक और मंत्रमुग्ध कर देने वाला था. भस्म आरती के बाद ढोल- डमरू और शंखनाद के बीच बाबा का श्रृंगार किया गया.

(उज्जैन बाबा महाकालेश्वर मंदिर)

बाबा महाकाल को क्या-क्या चढ़ाया गया?

महाशिवरात्रि के मौके पर बाबा महाकाल की खास पूजा की गई. परंपरा के मुताबिक, मंत्रोच्चारण के बीच बाबा महाकाल को दही, केसर वाले दूध, शहद और गंगाजल समेत अन्य सामग्री से स्नान कराया गया. इस दौरान पूरा मंदिर परिसर शिवमय नजर आया. मंदिर के सभी पुजारी और भक्त शिवभक्ति में लीन नजर आए.

#WATCH मध्य प्रदेश: आज महाशिवरात्रि के अवसर पर उज्जैन के श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है। pic.twitter.com/ZW4x6l8Kb5

— ANI_HindiNews (@AHindinews) February 25, 2025

महाशिवरात्रि पर कैसा है महाकाल मंदिर का नजारा?

महाशिवरात्रि पर बड़ी संख्या में भक्त बाबा के दर्शन और अभिषेक के लिए बाबा महाकाल के दर पर उमड़ रहे हैं. मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ देखी जा रही है. मंदिर में पूजा की शुरुआत सुबह 4 बजे ढोल-नगाड़ों के बीच भस्म आरती से हुई. इसके लिए रात से ही भक्तों की लंबी लाइनें लगी हुई थीं. ऐसी मान्यता है कि भोलेनाथ को नींद से जगाने के लिए यह आरती की जाती है.

(महाशिवरात्रि पर महाकालेश्वर मंदिर में पूजा)

कैसे बनती है बाबा महाकाल के श्रृंगार की भस्म?

बाबा महाकाल के मंदिर में होने वाली भस्म आरती दुनियाभर में प्रसिद्ध है. दूर-दूर से श्रद्धालु भस्म आरती के लिए उज्जैन पहुंचते हैं. यह सिर्फ आरती ही नहीं बल्कि अनोखी पूजा विधि है. इस दौरान भगवान शिव का श्रृंगार राख से किया जाता है. जानकारी के मुताबिक बाबा महाकाल के श्रृंगार के लिए पहले श्मशान से राख मंगवाई जाती थी. लेकिन अब गाय के गोबर, बेर की लकड़ियों, अमलताश, शमी और पीपल को जलाकर राख तैयार की जाती है. इसी राख से बाबा महाकाल का श्रृंगार और आरती होती है.

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