मोकामा में सोनू मोनू गैंग के साथ हुई गोलीबारी केस में पूर्व विधायक अनंत सिंह की जमानत याचिका को पटना सेशन कोर्ट ने खारिज कर दिया है.
बिहार के बाहुबली और पूर्व विधायक अनंत सिंह की जमानत याचिका को पटना सेशन कोर्ट ने खारिज कर दिया है. यह फैसला मोकामा में सोनू मोनू गैंग के साथ हुई गोलीबारी की घटना में उनकी कथित संलिप्तता के मामले में आया है. अनंत सिंह फिलहाल पटना बेउर जेल में बंद हैं.
अनंत सिंह की पिछली जमानत याचिका एमएलए एमपी कोर्ट ने खारिज कर दी थी और फिर उन्होंने सेशन कोर्ट में जमानत के लिए अपील की थी, जिसे आज खारिज कर दिया गया है. अब राहत पाने के लिए अनंत सिंह को पटना हाई कोर्ट का रुख करना होगा.
क्या है पूरा मामला
मोकामा में 22 जनवरी की शाम को एक गोलीबारी की घटना हुई थी, जिसमें अनंत सिंह के काफिले पर सोनू-मोनू गिरोह ने हमला किया था. हमलावरों ने सिंह के काफिले पर अंधाधुंध गोलियां बरसाईं, जिसके जवाब में सिंह के समर्थकों ने भी गोलीबारी की. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच 60 से 70 गोलियां चली थीं.
हालांकि, पुलिस का कहना है कि घटना के दौरान 16-17 गोलियां चलीं थी. इस घटना में सिंह को कोई नुकसान नहीं पहुंचा था. पुलिस ने गोलीबारी की घटना के सिलसिले में दो संदिग्धों-सोनू और रोशन को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने गोलीबारी की घटना के सिलसिले में तीन केस दर्ज की हैं.
अनंत सिंह के बारे में
‘छोटे सरकार’ के नाम से मशहूर अनंत सिंह एक बाहुबली नेता हैं, जिन्होंने बिहार की मोकामा विधानसभा सीट का कई बार प्रतिनिधित्व किया है. उनकी पत्नी और मोकामा की मौजूदा विधायक नीलम देवी हाल ही में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) छोड़ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जनता दल-यूनाइटेड (जदयू) में शामिल हो गई थीं.
सोनू-मोनू गुट के बारे में
सोनू-मोनू और अनंत सिंह के गुट के बीच काफी पहले से ही दुश्मनी रही है. दोनों गुटों के बीच वर्चस्व की लड़ाई काफी पुरानी है. सोनू-मोनू 2009 से ही अपराध की दुनिया में सक्रिय हैं.अपराध की दुनिया में एंट्री से पहले सोनू-मोनू मोकामा और आसपास के इलाकों से गुजरने वाली ट्रेनों में लूटपाट किया करते थे. इसके बाद उन्होंने अपने क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाना शुरू किया. कहा जाता है कि धीरे-धीरे ये अपने गांव से निकलकर यूपी में मुख्तार अंसारी गैंग तक पहुंचे. बताया जाता है कि सोनू-मोनू ने अनंत सिंह के इलाके में अपनी धाक जमाने के लिए मुख्तार अंसारी के गिरोह से संपर्क किया था.
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