अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 2 अप्रैल को ही दूसरे तमाम देशों पर जवाबी टैरिफ लगाने वाले हैं. इस दिन को उन्होंने अमेरिका के लिए लिबरेशन डे यानी मुक्ति दिवस करार दिया है.
वो घड़ी आ गई है जिसपर पूरी दुनिया की नजर है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 2 अप्रैल को ही दूसरे तमाम देशों पर जवाबी टैरिफ लगाने वाले हैं. इस दिन को उन्होंने अमेरिका के लिए लिबरेशन डे यानी मुक्ति दिवस करार दिया है. पूरी वर्ल्ड इकनॉमी संभल कर वाशिंगटन की ओर देख रही है, अपने अगले कदम को रखने के पहले गहराई नाप लेना चाहती है. क्या कोई ट्रेड वॉर छिड़ने जा रहा है, इस बात से वर्ल्ड इकनॉमी सहमी हुई है. सब यह जानना चाहते हैं कि जवाबी टैरिफ से क्या किसी देश को छूट मिलेगा.
अमेरिकी समयानुसार शाम के 4:00 बजे (भारत में गुरुवार की देर रात 1.30 बजे) व्हाइट हाउस के रोज गार्डन में कैबिनेट मेंबर्स के साथ ट्रंप टैरिफ उपायों को लागू करेंगे. उन्होंने वादा किया है कि वे दूसरे देशों को अमेरिका से “छीनने” नहीं देंगे और अमेरिकी उद्योग को एक नया “स्वर्ण युग” देंगे.
चलिए समझने की कोशिश करते हैं कि लिबरेशन डे पर ट्रंप से हम क्या कुछ उम्मीद कर सकते हैं:
दुनिया को क्या उम्मीद?
अमेरिकी मीडिया ने कहा कि ट्रंप सबपर एक रेट से टैरिफ लगाने पर विचार कर रहे हैं- 20 प्रतिशत टैरिफ. साथ ही कुछ देशों को इससे राहत दे सकते हैं. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा है कि ट्रंप घोषणा से एक दिन पहले अपने शीर्ष सलाहकारों से मुलाकात कर रहे थे, “यह सुनिश्चित करने के लिए कि यह एक आदर्श डील है.” उन्होंने कहा कि टैरिफ बुधवार के लागू होने के बाद “तुरंत” प्रभाव में आ जाएगा.
भारत के लिए क्या उम्मीद?
घोषणा से एक दिन पहले ट्रंप ने दावा किया कि भारत जवाबी टैरिफ से बचने के लिए अपने टैरिफ को “काफी हद तक” कम कर देगा. उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि बहुत सारे (देश) अपने टैरिफ हटा देंगे क्योंकि वे सालों से अमेरिका पर गलत तरीके से टैरिफ लगा रहे हैं… मुझे लगता है कि मैंने सुना है कि भारत, अभी कुछ समय पहले, अपने टैरिफ में भारी कटौती करने जा रहा है.”
अगर भारत अपने टैरिफ को कम करेगा तो उम्मीद है कि उसे ट्रंप के जवाबी टैरिफ से छूट मिल जाए. मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो प्रधान मंत्री कार्यालय (पीएमओ) के हस्तक्षेप के बाद भारत अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए संदर्भ की शर्तों पर सहमत हो गया है.
2021-22 से 2023-24 तक अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार था. पीटीआई की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के कुल माल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 18 प्रतिशत, आयात में 6.22 प्रतिशत और द्विपक्षीय व्यापार में 10.73 प्रतिशत है.
यूरोप के लिए क्या उम्मीद?
द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार यूरोपीय यूनियन और ब्रिटेन के नेता सेक्टर वाइज टैरिफ की संभावना के साथ-साथ यूरोप की वैट दरों का मुकाबला करने के लिए लगाए जा सकने वाले स्थायी शुल्कों के बारे में चिंतित हैं, जिसे वह एक डी फैक्टो टैक्स मानते हैं. ट्रंप पहले ही 3 अप्रैल से शुरू होने वाली कारों पर टैरिफ की घोषणा कर चुके हैं. यूरोपीय मार्केट के लिए यह एक और झटका है क्योंकि वहां से बड़े पैमाने पर अमेरिका को कार का निर्यात होता है.
दुनिया कैसे रिएक्ट कर सकती है?
यूरोपीय यूनियन और कनाडा सहित कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं ने पहले ही ट्रंप को चेतावनी दे दी है कि अगर टैरिफ लगाया जाएगा तो वे चुप नहीं बैठेंगे. कनाडा के प्रधान मंत्री मार्क कार्नी ने मंगलवार को कहा, “कनाडा के लिए लड़ने के लिए हम जो भी कदम उठाएंगे, उसमें हम बहुत विचार-विमर्श करेंगे.” यूरोपीय यूनियन ने मंगलवार को कहा कि उसे अभी भी समाधान पर बातचीत की उम्मीद है – लेकिन यदि आवश्यक हो तो जवाबी कार्रवाई करने के लिए “सभी ऑप्शन मेज पर हैं”. ब्रिटिश प्रधान मंत्री कीर स्टार्मर ने यूके-यूएस व्यापार समझौते की दिशा में ट्रंप के साथ बात की है. वियतनाम ने मंगलवार को कहा कि वह ट्रंप को खुश करने के लिए कई वस्तुओं पर शुल्क में कटौती करेगा. भारत को अभी भी उम्मीद है कि उसे टैरिफ से राहत मिलेगी, भले उसके बदले उसे खुद के टैरिफ में कटौती करने पड़े.
बिजनेस पर क्या असर?
ट्रंप के जवाबी टैरिफ की घोषणा से पहले वैश्विक शेयर बाजारों में मंगलवार को कारोबार में ज्यादातर तेजी दिखी. ट्रंप किसपर कितना टैरिफ लगाएंगे, यह ग्लोबल मार्केट को नहीं पता और इससे अनिश्चितता की स्थिति है. अमेरिकी शेयर बाजार शुरू में निचले स्तर पर रहे, लेकिन घोषणा से एक दिन पहले मिश्रित क्षेत्र में बंद हुए. एशियाई और यूरोपीय शेयर बाजारों ने अपने हाल के कुछ भारी घाटे की भरपाई कर ली है, क्योंकि व्यापारियों को टैरिफ से पहले अधिक स्पष्टता की उम्मीद थी.
अब बात कि टैरिफ के एलान के बाद क्या होगा? द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार यूरोपीय यूनियन सभी निवेशकों के सामने खुद को एक सुरक्षित पनाहगाह के रूप में पेश कर रहा है. आयरलैंड के वित्त मंत्री पास्कल डोनोहो ने कहा, “मुझे लगता है कि निवेशक इस समय यूरोपीय यूनियन का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं और यूरोपीय यूनियन में निवेश कर रहे हैं. मुझे लगता है कि वैश्विक मंच पर पूर्वानुमान और व्यवस्था के मूल्य की सराहना बढ़ रही है.”
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