उत्तराखंड के एक सुनसान गांव में रह रहे बुजुर्ग दंपति की यह कहानी पलायन, अकेलेपन और रिश्तों के दर्द को बेहद मार्मिक तरीके से दिखाती है. सच्ची घटना से प्रेरित फिल्म ‘पायरे’ बताती है कि बुढ़ापे में अपनों का साथ छूट जाने का दर्द कितना गहरा हो सकता है. उत्तराखंड के एक सुनसान गांव में रह रहे बुजुर्ग दंपति की यह कहानी पलायन, अकेलेपन और रिश्तों के दर्द को बेहद मार्मिक तरीके से दिखाती है. सच्ची घटना से प्रेरित फिल्म ‘पायरे’ बताती है कि बुढ़ापे में अपनों का साथ छूट जाने का दर्द कितना गहरा हो सकता है. NDTV India – Latest
More Stories
अलौकिक अयोध्या! 30 लाख दीपों के साथ बना नया विश्व रिकॉर्ड, भव्य समारोह में हुआ प्रभु राम का राज्याभिषेक
दिवाली पर मंदिर कैसे साफ करें? मार्बल और लकड़ी का मंदिर साफ करने का आसान तरीका
IAS परी बिश्नोई ने खास अंदाज में दी दिवाली की शुभकामनाएं, एयरपोर्ट पर बेटी दौड़कर गले से लिपटी