April 7, 2025

मनोज कुमार के अंतिम संस्कार में पैपराजी से नाराज हुए अभिषेक बच्चन, वीडियो में घूरते हुए आए नजर, फैंस बोले- सही किया…​

दिवंगत एक्टर मनोज कुमार का शुक्रवार को 87 की उम्र में दिल से जुड़ी प्रॉब्लम के कारण निधन हो गया, जिसके बाद शनिवार को राजकीय सम्मान के साथ पवन हंस श्मशान घाट में अंतिम संस्कार किया गया.

दिवंगत एक्टर मनोज कुमार का शुक्रवार को 87 की उम्र में दिल से जुड़ी प्रॉब्लम के कारण निधन हो गया, जिसके बाद शनिवार को राजकीय सम्मान के साथ पवन हंस श्मशान घाट में अंतिम संस्कार किया गया.

दिवंगत एक्टर मनोज कुमार का शुक्रवार को 87 की उम्र में दिल से जुड़ी प्रॉब्लम के कारण निधन हो गया, जिसके बाद शनिवार को राजकीय सम्मान के साथ पवन हंस श्मशान घाट में अंतिम संस्कार किया गया. सुपरस्टार को उनके बेटे कुणाल गोस्वामी ने मुखाग्नि दी. इस दौरान अभिषेक बच्चन के साथ अमिताभ बच्चन तो अरबाज खान के साथ उनके पिता सलीम खान मौजूद नजर आए. जबकि प्रेम चोपड़ा, रजा मुराद, बिंदू दारा सिंह, अनु मलिक, शहबाज खान और धीरज कुमार को भी अंतिम संस्कार में शामिल होते देखा गया. इसी बीच एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें अभिषेक बच्चन को मीडिया पर गुस्सा करते हुए देखा जा सकता है.

यह सब तब शुरू हुआ जब अभिषेक श्मशान घाट में पहुंचे और पैपराजी तस्वीरें क्लिक करना जारी रखे हुए थे. दुख की इस घड़ी में थोड़ी प्राइवेसी की मांग करते हुए, उन्होंने पैपराजी टीम के एक सदस्य से बात करते हुए देखा जा सकता है. जहां एक्टर को एक फोटोग्राफर का हाथ हिलाते हुए भी देखा गया जो, उन्हें रिकॉर्ड कर रहा था. वहीं आगे वह उन्हें गुस्से में घूरते हुए नजर आते हैं, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

इस घटना का एक वीडियो अब इंटरनेट पर वायरल हो रहा है, जिस पर लोग रिएक्शन देते हुए नजर आ रहे हैं. एक यूजर ने लिखा, सही तो किया अभिषेक ने. दूसरे यूजर ने लिखा, उन्होंने बिल्कुल सही किया. वह वहां मूवी प्रमोशन के लिए नहीं गए थे. लोग उनके चेहरे पर कैमरा लगाए हुए हैं. उन्हें असभ्य मत कहिए. गौरतलब है कि अभिषेक बच्चन अंतिम संस्कार में पिता अमिताभ बच्चन के साथ पहुंचे थे. जहां दोनों शांति से दिवंगत सुपरस्टार को अंतिम विदाई देते हुए नजर आए थे.

बता दें, मनोज कुमार ने 1957 में आई फिल्म फैशन से सिनेमा में अपना सफर शुरू किया था, लेकिन 1961 में आई कांच की गुड़िया ने उन्हें बड़ा ब्रेक दिया. इसके बाद उनकी देशभक्ति वाली फिल्मों जैसे उपकार (1967), पूरब और पश्चिम (1970) और क्रांति (1981) के कारण उन्हें “भारत कुमार” उपनाम मिला, जिसके लिए वह आज भी जाने जाते हैं.

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