सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को कह चुकी है कि वह न्यायपालिका का सम्मान करती हैं, लेकिन सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में नियुक्तियों को लेकर कोर्ट के फैसले से ‘‘मानवीय आधार पर’’ असहमत हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल सरकार को बड़ा झटका देते हुए राज्य सरकार और सहायता प्राप्त स्कूलों में 25,753 शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति को अवैध करार दिया. इसके साथ ही इस पूरी चयन प्रक्रिया को ‘‘त्रुटिपूर्ण और विकृत” बताया. अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल सीएम ममता बनर्जी पर निशाना साधा है. बीजेपी ने शुक्रवार को मांग की कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इस्तीफा दें.
ममता को सत्ता में रहने का अधिकार नहीं…
केंद्रीय मंत्री और पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने दावा किया कि शिक्षकों भर्ती में जेल जाने वाली बनर्जी हरियाणा के ओ पी चौटाला के बाद दूसरी मुख्यमंत्री होंगी. वहीं पार्टी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने जोर देकर कहा कि अगर बीजेपी राज्य में सत्ता में आती है तो कानून की पूरी ताकत उन पर पड़ेगी. संबित पात्रा ने कहा, “ममता बनर्जी को अब सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है. अगर उनमें जरा भी जिम्मेदारी की भावना बची है तो उन्हें पद छोड़ देना चाहिए… वे निश्चित रूप से जेल जाएंगी.”
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पश्चिम बंगाल सीएम ममता बनर्जी
पश्चिम बंगाल BJP अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने की ये मांग
मजूमदार ने कहा कि करीब 26,000 भर्ती में से करीब 20,000 का चयन सही तरीके से हुआ जबकि बाकी को राज्य की सत्तारूढ़ टीएमसी नेताओं द्वारा कथित तौर पर रची गई घोटाले से फायदा हुआ. उन्होंने मांग की कि अब बर्खास्त किए गए योग्य कर्मचारियों को सरकार द्वारा सत्तारूढ़ पार्टी के कोष या मुख्यमंत्री राहत कोष के माध्यम से वेतन दिया जाना चाहिए, क्योंकि वे और उनके परिवार अंधकारमय भविष्य की ओर देख रहे हैं.
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ममता पर कोर्ट की अवमानना का केस चलना चाहिए
संबित पात्रा ने कहा कि फैसले के बाद बनर्जी की विश्वसनीयता और वैधता खत्म हो गई है. यह देखते हुए कि ममता बनर्जी ने कहा कि वह मानवीय आधार पर फैसले को स्वीकार नहीं कर सकती हैं, उन्होंने कहा कि उन पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा अदालत की अवमानना का आरोप लगाया जाना चाहिए. गुरुवार को अपने फैसले में राज्य सरकार के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय द्वारा की गई आलोचनाओं का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि अगर जिला न्यायालय ने भी मोदी सरकार के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणी की होती तो इंडिया ब्लॉक के नेता “लोकतंत्र की हत्या” का रोना रोते.
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बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा
पूरे मंत्रिमंडल को सलाखों के पीछे होना चाहिए
मजूमदार ने कहा कि राज्य सरकार के पूरे मंत्रिमंडल को सलाखों के पीछे होना चाहिए, क्योंकि इसने भ्रष्टाचार में शामिल लोगों को बचाया लेकिन वास्तविक उम्मीदवारों को उनके भाग्य पर छोड़ दिया. उन्होंने कहा कि कलकत्ता हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को उन उम्मीदवारों की पहचान करने का सुझाव दिया था जिनकी भर्ती भ्रष्ट तरीकों से हुई थी. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने हालांकि इस पर विचार करने से इनकार कर दिया, नतीजतन सभी सफल उम्मीदवारों को बर्खास्त कर दिया गया. उन्होंने कहा कि सरकार को वास्तविक उम्मीदवारों के भविष्य को बचाने के लिए अभी भी ऐसी कानूनी संभावना तलाशनी चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (WBSSC) की खिंचाई करते हुए कहा कि उसने राज्य द्वारा संचालित और राज्य द्वारा सहायता प्राप्त स्कूलों में 25,753 शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्ति में खामियों और अवैधताओं को “जानबूझकर” छुपाया. मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने अपने फैसले में तीखी टिप्पणी की, जिसके तहत उसने 25,753 शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्ति को रद्द कर दिया. इस तरह कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले को ही सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है.
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