2024 से फरवरी 2025 तक, रान्या ने दुबई और बेंगलुरु के बीच कुल 26 बार हवाई यात्रा की, जो इस बात का सबूत है कि सोने की तस्करी कितनी संगठित और नियमित थी.
बेंगलुरु एयरपोर्ट पर 3 मार्च 2025 को एक हाई-प्रोफाइल महिला को रोकने के बाद जो खुलासा हुआ, उसने पूरे देश को हिला कर रख दिया. डीआरआई (डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस) ने जब रान्या राव को शक के आधार पर रोका और तलाशी ली, तो उसके कपड़ों के नीचे 14.2 किलो तस्करी का सोना बरामद हुआ. यह सिर्फ शुरुआत थी. जब अगली सुबह 4 मार्च को डीआरआई की टीम ने रान्या के घर पर छापा मारा, तो वहाँ से अतिरिक्त सोना और ₹2.67 करोड़ की बेहिसाब नकदी भी मिली. इसके तुरंत बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया.
कौन है रान्या राव?
इस केस ने और भी तूल तब पकड़ा जब यह सामने आया कि रान्या राव, कर्नाटक के डीजीपी हाउसिंग रामचंद्र राव की सौतेली बेटी है.पुलिस प्रशासन में संपर्क होने के बावजूद, कानून के लंबे हाथों से वह बच नहीं सकी.जांच में सामने आया कि रान्या राव को राज्य प्रोटोकॉल के अधिकारी एयरपोर्ट से बाहर निकलने में मदद कर रहे थे.पुलिस विभाग के इस कर्मी से भी पूछताछ हुई है.आरोप है कि प्रोटोकॉल डीजीपी रामचन्द्र राव के निर्देश पर दिए गए थे.
जांच एजेंसियों की कार्रवाई और IAS अधिकारी की नियुक्ति
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, ईडी (प्रवर्तन निदेशालय), सीबीआई (सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन) और डीआरआई तीनों एजेंसियां इस मामले की तहकीकात कर रही हैं. इतना ही नहीं, राज्य सरकार ने इस केस में IAS अधिकारी गौरव गुप्ता को नियुक्त किया,ताकि यह पता लगाया जा सके कि रान्या राव को एयरपोर्ट पर प्रोटोकॉल किसके कहने पर दिया गया था.क्या सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत थी? क्या यह तस्करी लंबे समय से चल रही थी? यह जाँच अब इन सवालों के जवाब खोज रही है.
तरुण राजू: सोने की खरीद का अहम खिलाड़ी
रान्या राव इस गोरखधंधे में अकेली नहीं थी.तरुण राजू उसकी मदद करता था.तरुण अपनी अपने शोरूम वीरा डायमंड्स के नाम पर दुबई में हीरा खरीदता था.तरुण न केवल सोने की खरीद में उसका सहयोगी था, बल्कि वह रन्या के साथ दुबई की यात्राएँ भी करता था.
DRI के मुताबिक़ 3 मार्च को तरुण दुबई में रन्या के साथ था
2024 से फरवरी 2025 तक, रान्या ने दुबई और बेंगलुरु के बीच कुल 26 बार हवाई यात्रा की, जो इस बात का सबूत है कि सोने की तस्करी कितनी संगठित और नियमित थी.तरुण की गिरफ्तारी के बाद यह स्पष्ट हुआ कि वह दुबई से अवैध रूप से सोना लाने और बेंगलुरु में इसे बेचने में रन्या की सहायता करता था.
साहिल जैन: सोने का सौदागर और हवाला ऑपरेटर
जब जांच आगे बढ़ी, तो एक और बड़ा नाम सामने आया साहिल जैन.नवंबर 2024 से फरवरी 2025 तक, साहिल जैन ने तस्करी के 49.6 किलो सोने को ठिकाने लगाया, जिसकी कीमत लगभग ₹40.13 करोड़ आंकी गई. डीआरआई की रिपोर्ट के अनुसार, साहिल ने रान्या राव की मदद से ₹38.39 करोड़ की हवाला ट्रांजैक्शन को दुबई भेजने में सहायता की. इसके अलावा, उसने ₹1.73 करोड़ की राशि बेंगलुरु में रन्या तक पहुंचाने में भी सहयोग किया. यह भी सामने आया कि रान्या राव ने साहिल जैन का नंबर अपने फोन में “Au Bangalore Dispatch Newton” के नाम से सेव कर रखा था.
डीआरआई का खुलासा: हवाला और बेहिसाब संपत्ति
डीआरआई का मानना है कि रान्या के घर से जब्त ₹2.67 करोड़ की नकदी हवाला से जुड़े मुनाफे की रकम थी. यह पैसा दुबई में सोना खरीदने और बेंगलुरु में ऊंचे दामों पर बेचने से कमाया गया था. मामले की जांच और आगे की कार्रवाई
इस मामले में ईडी, सीबीआई और डीआरआई तीनों एजेंसियाँ लगातार सबूत जुटाने में लगी हुई हैं.अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या रान्या राव और उसके सहयोगी कानून के शिकंजे से बच पाएंगे? या फिर यह केस तस्करी की दुनिया में एक मिसाल बनेगा? देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह सिर्फ एक आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित आपराधिक नेटवर्क का पर्दाफाश है. आने वाले दिनों में, इस केस में और बड़े नाम सामने आ सकते हैं, जो इस रैकेट से जुड़े हो सकते हैं.
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