एक मृतदेह, रेललाइन के किनारे तीन दिन पड़ा रहा। कोई पास नहीं गया, कोई उसे उठाने नहीं आया।
वह मृतदेह था प्रदीप प्रूस्ति की माँ का तब प्रदीप एक छोटा बच्चा था, लेकिन उसी दिन उसने अपने मन में एक आजीवन शपथ ली, “माँ की तरह किसी को भी लावारिस मरने नहीं दूँगा।”
आज 13 सालों से वह शपथ उसके जीवन का हिस्सा बन गई है, अपनी पत्नी के साथ मिलकर प्रदीप प्रूस्ति कैसे अपना वादा निभा रहे हैं जरूर देखिये उनकी कहानी।
3000+ लावारिस लाशों को इस दंपति ने दी अंतिम विदाई | Odisha Couple Cremates Unclaimed Dead Bodies
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